Share Market क्या है ? Share Market में उतार-चढ़ाव कैसे होता है ?

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पैसे इन्वेस्ट करने की अहमियत के बारे में तो हम सभी जानते हैं रिस्क तो गाड़ी चलाने में भी है अगर आप अच्छे से गाड़ी चलाना चाहते हो तो एक्सीडेंट का ख़तरा कम हो जाता है ठीक उसी तरह Share Market में भी  हैं ये आपके लिए जुआ ही है आपको यह समझना होगा कि वे calculated और Non calculate रिस्क में फर्क होता है आपका Share Market में कैलकुलेटेड रिस्क लेना होगा कैलकुलेटर्स कैसे लेते है आइए देखते हैं सबसे पहले आप ये डिसाइड करें कि आप कितना रिस्क ले सकते अगर आप यंग और महीने में अच्छा पैसा बचा लेते हो तो आप Share Market में ज्यादा रिस्क ले सकते हो लेकिन अगर आप साठ साल के हो तो आपको कम रिस्क लेना होगा साथ ही आप ये देखो की आप जो रिस्क ले रहे हो उस पर आपको कितना प्रोफिटस मिल रहा है |

Share Market क्या है ?

Share Market या स्टॉक एक्सचेंज एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ share ,bonds,Mutal fund वगैरह की खरीद बिक्री होती है इस बाजार में भाग लेने वाले निवेशक Share ब्रोकर और कंपनियों के कामकाज करने के लिए Share Market या सभी में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है अब सेबी क्या है तो Share Market को सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी के नियमों के अनुसार चलना पड़ता है Share का सीधा अर्थ होता है हिस्सा Share Market में किसी कंपनी में हिस्से को Share कहा जाता है इन Share को अलग अलग लोगों द्वारा खरीदा और बेचा जाता है इस मार्केट में भाग लेने वाले निवेशकों Share दलालों पर व्यापारियों को व्यापार का संचालन करने के लिए Share Market और सभी के साथ स्वयं को पंजीकृत कराना पड़ता है कंपनी के फाउंडर के पास अगर पैसे तो खुद के पैसे उसमें लगा सकता है कुछ अमीर लोगों को मनाकर उनसे अपनी कम्पनी में इन्वेस्ट करवा सकता है या फिर पब्लिक फंडिंग के जरिए पैसे ला सकता है पब्लिक फंडिंग में कंपनी आम जनता से पैसे लेती वो अपने Share Market में sell कर देती है जिससे आईपीओ कहा जाता है यानी इनिशियल पब्लिक ऑफर फिर आम लोग share को साइकिल के जरिए खरीदते है और कंपनी के हिस्सेदार बन जाते हैं इस तरह से कंपनी को ग्रो करने के लिए पैसे मिल जाते है इग्ज़ैम्पल के लिए अगर एक कंपनी की कीमत तीन करोड़ और उसने तीन लाख शहर से निकले तो उसके हर एक Share की कीमत होगी सौ रुपये अगर आप उस के बीच Share खरीद लेते हैं तो आप उस कंपनी में दो हज़ार रुपए के मालिक बन जाते हो आपको उस कम्पनी में दो हज़ार रुपये का हिस्सा है अगर कंपनी लॉस में जाकर एक करोड़ की हो जाती तो उसका एक Share तैंतीस रुपये का हो जाएगा आप जब चाहें अपने Share्स को बेचकर अपने पैसे को किसी को वापस पा सकते हैं अगर आपको लगता है कि कंपनी डूब रही है फ्यूचर में आपको प्रॉफिट कमाकर नहीं दे सकते तो आप उस कंपनी के Share को Share Market में बेच सकते हो और उसे अपने पैसे वापस पा सकते हैं कंपनी को प्रॉफिट होता है तो कभी कभी उस अपने Share होल्डर्स में बांट देती या तो अपने Share होल्डर्स को पैसे दे सकती है या फिर उसे और Shares दे सकती है इससे डिविडेंड कहा जाता है कंपनी के Share के दाम तब बढ़ जाती है जब इसे बहुत से लोग खरीदना चाहते मार्केट का यूनिवर्सल लॉ डिमांड को जब राइज़ एंड वाइज़ पासा इसका मतलब है अगर एक कम्पनी बहुत प्रॉफिट कमा रही है तो उसके स्टॉक्स बहुत से लोग खरीदना चाहेंगे और उसके स्टॉक्स बहुत से लोग खरीदना चाहेंगे उसकी डिमांड बढ़ जाएगी और उसकी कीमत भी ठीक इसी तरह अगर कंपनी नुकसान में जा रही है तो उसके स्टॉक्स कोई नहीं लेना चाहेगा जिन लोगों ने उसे ले रखे है उसे बेचने लगेंगे और उसके प्राइस घट जाएंगे देखिए सिंपल रूल ये है कि आप को एक कंपनी में तब इन्वेस्ट करना चाहिए जब उसके स्टॉक की कीमत कम इस के बाद जब उसकी कीमत बढ़ेगी तो या तो आप उसे बेच दीजिए और तुरंत पैसे वापस ले लीजिए या फिर लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करने के इरादे से उसे वहीं पर छोड़ दीजिए इग्ज़ैम्पल बताता हूँ 2004 में जिससे आदमी गूगल में लॉन्ग टर्म के लिए अपना पैसा लगाया होगा उसने अब तक अरबों रुपये का प्रॉफिट डिविडेंड के रूप में मिला होगा और अगर वो अपने शेष नहीं भेजता है तो उसे जिंदगीभर गूगल से पैसे मिलते रहेंगे लेकिन सारे कंपनी गूगल और फेसबुक की तरह नहीं होती बहुत सी फैल हो जाती है जिससे न उसको नुकसान हो जाता है इसलिए आपको Share Market को बहुत डीप में समझने की जरूरत है | इंडिया में दो Share Market हैं जिनका नाम है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज सबसे बड़ा Share Market है आप इन दोनों में से किसी में अपना पैसा लगा सकते हैं इसमें इन्वेस्ट करने के लिए आपको अपना Demat account खोलना होगा जिससे आपके बैंक अकाउंट में पैसे रखे होते हैं इसी तरह से Demat account में Share रखे होते हैं ये Demat account आपके Saving account से लिंक हो जाता है |

Share Market में शुरुआत कहाँ से करें ?

Share Market में शुरुआत करना चाहते हैं उन्होंने सिर्फ Share Market में सुना है चाहते हैं Share मार्केट में पैसा लगाएं और उनको तरीका नहीं पता है कैसे Share Market में पैसा लगाते है अगर आप भी उनमें से हैं आप Share Market में कैसा पैसा लगाते हैं और कैसे पैसा कमाते हैं तो दो सौ सबसे पहले आपको चाहिए होगा कुछ डॉक्युमेंट आधार कार्ड पैन कार्ड और इसके बाद एक Saving account होना चाहिए आपके पास और उसका चक Demat account के थ्रू लगता है Demat account trading अकाउंट होता है ये Demat account ओपन होता है Demat account  ये ब्रोकर से ओपन करा सकते हैं ब्रोकर जैसे Shareखान एंजल ब्रोकिंग जैसे  करा सकते हो इसमें आपको ध्यान देना होता है यदि maintenance के चार्ज लगते है  जब हम Share खरीदते और बेचते हैं उसपे थोड़ा सा ब्रोकरेज चार्ज का पता करना होता है कौनसी कम्पनी ज्यादा ले रही है जो ज्यादा ले रही है उसमें आपको demat account नहीं ओपन करना है जो ब्रोकरेज कम ले रही है उसमें आपको ओपन करना है अपना Demat account ये देख लिया अपने ब्रोकरेज कंपनी का पता करना अगर आप बैंक में जा सकते हैं तो बैंक में जा सकते हो जो नियमित एकाउन्ट खोलेंगे उनका नंबर या फिर इंटरनेट या उनकी वेबसाइट ओपन करके आप आराम से वहाँ पे अप्लाई कर सकते हो या वहाँ कस्टमर केयर नंबर बता उसमें भी कॉल कर के आप खोल सकते हो तो वो आपका आगे डॉक्युमेंट जो भी है कलेक्ट करेंगे आपका account ओपन कर देंगे इस प्रोसेसर में दस पंद्रह दिन का टाइम लॉन्ग जाता है और दूसरा चीज़ ये है की आपको ध्यान देना है किसी ऐसे ब्रोकर के चक्कर में यह जान लेना पसंद जॉब से सात हज़ार पांच हज़ार ढ़ाई हज़ार करके पैसे ले ले तो ऐसा कुछ पैसा देने की जरूरत नहीं है किसी को Demat account ओपन करते समय आपको हज़ार रुपये  से भी खोल सकते हैं वैसे तो मेरा एकाउन्ट खोला तो फ्री में खोला था कोई चार्ज नहीं दिया था मैने उसके बाद ट्रेनिंग शुरू की थी तब अपना Saving account बैलेंस Demat account में डाला था और Demat account Share खरीदना और बेचना शुरु किया था कुछ भी पैसा अपने लिमिटेड Share का जो भी पैसा आप चाहते हो की नहीं वापस अपने अकाउंट में लैपटॉप ट्रांसफर कर लोगे Saving account में Saving account का इसलिए जरूरत पड़ता है Demat account से लिंक करने के लिए ताकि पैसा आपका जो होता है वो Saving account में होता है आपके बैंक अकाउंट में होता है यहाँ से पैसा आपके saving account में जाता है जिससे आप Share खरीदते हो और Share बेचने के बाद फिर वापस से जो पैसा मिल जाता है उस पैसे को आप चाहें तो अपने Saving account में फर्स्ट ईयर कर लो पहले यह प्रोसेसर के थ्रू हो जाता था जिसके लिए ब्राण्ड जानी पड़ती थी लेकिन अब ऑनलाइन सारा सिस्टम हो गया है तो काफी हो गया है तो आप अपने Saving account Demat account का यूज़ करके पैसे ट्रांसफर कर सकते हो आप तीसरी कंपनी में अकाउंट ओपन करोगे या जिसमें ब्रोकर के पास Demat account ओपन करोगे तो आपको एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड देगा और सारे कम्पनी के पास आजकल application and software होते हैं जो मोबाइल पे आप आसानी से इंस्टॉल करके ये सारा प्रोसेसर आप आसानी से समझ सकते हैं और बाकी वो ट्रेनिंग भी लगभग थोड़ा बहुत ही देते है  अगर आप लालच मैं काम करोगे तो फिर नुकसान भी हो सकता है क्योंकि अगर आपको नॉलेज नहीं तो नुकसान पहुँचाए चीजें समझ में तो आनी चाहिए अगर आपको Share Market में निवेश करना है तो पहले छोटे लेवल पे लगा के उसको थोड़ा थोड़ा Share खरीद  सिख लो अगर आपको लगता है कि दो तीन महीने में काम करने के बाद आपको लगता है कि आप यहाँ पैसा बना सकते हो पांच हज़ार में क्या है तब आप चाहे आगे बढ़ो अदरवाईज आप इसे फिर निकल जाऊ फिर भी आपके काम की चीज़ नहीं है  यही इसकी सच्चाई है पोस्टिंग निगेटिव की बात होती है कई लोग कहते हैं कि आप नेगेटिव थिंकिंग देते हो तो मैं मानता हूँ इस चीज़ को क्योंकि मेरा काम सही चीज़ बताना हो सकता है |

BSE और NSE क्या है? 

NSE और BSE भारत के दो बड़े स्टॉक कम्पनी है आपको नाम से पता चल गया होगा जहा स्टॉक की लेनदेन होती है उसी स्टॉक एक्सचेंज कहते हैं एक्सचेंज का काम यही होता है कि सेलर से Share लेके बायर को देना स्टेट फार्म का मतलब माध्यम का काम करता है 2016 तक के आंकड़ों से भारत में कुल स्टॉक एक्सचेंज है जैसे की कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज चेन्नई स्टॉक एक्सचेंज के कुल स्टॉक की लेकिन NSE और BSE में भारत की सबसे ज्यादा Trading होती है NSE का फुल फॉर्म नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और BSE का फुल फॉर्म बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज है मुंबई स्टॉक एक्सचेंज एशिया में सबसे पहला और पुराना स्टॉक एक्सचेंज है पुराने जमाने में एक जगह तय की जाती थी जहा पे सारे टेंडर जमा हो जाते थे और वहाँ खरीद बिक्री होती थी फिर में NSE की स्थापना हुई जहाँ पे Trading का सारा प्रोसेसर कंप्यूटराइज कर दिया गया पहले Share की खरीदी बिक्री में बहुत टाइम जाता था छे महीने लगते थे लेकिन इसी के आने के बाद कुछ ही मिनटों में Shares की खरीदी बिक्री होने लगी ऐसा कहा जाता है कि पहले BSE ने कंप्यूटराइज होने से मना किया था लेकिन 1995 में BSE कंप्यूटराइज हो गयी एनएससी और BSE दोनों को सेबी के नियम लागू है से भी मतलब सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया सिमी की स्थापना गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने की थी तो आप मार्केट में कुछ गलत चीजें होने लगी थी इसलिए गवर्नमेंट ने उसे रोकने के लिए सेबी की स्थापना की बैंकिंग के लिए आरबीआई है वैसे स्टॉक एक्सचेंज के लिए भी है BSE में कुल 5000 से ज्यादा कंपनी रजिस्टर्ड हैं और इनमें से ज्यादा कम्पनी नहीं चले अब हम BSE और NSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन समझतें हैं मार्केट कैपिटलाइजेशन मतलब BSE और NSE में लिस्टेड सारे कम्पनी के Share का कुल मिलाके वैल्यूएशन जुलाई 2017 के अनुसार BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन दो ट्रिलियन डॉलर और NSE का 1 ट्रिलियन डॉलर है

Sensex क्या होता है

सबसे पहले बात करेंगे कि Sensex क्या होता है  एक ऐसा सूचकांक जो बहुत ही ज्यादा सम्वेदनशील यानी सेंसिटिव हो इसलिए इसे Sensex कहा गया और यह बनता कैसे है तो इसमें तीस बड़ी कंपनियों के Share मूल्यों में होने वाले उतार चढ़ाव को दर्ज किया जाता है इससे संवेदी सूचकांक यानी Sensex इसलिए कहना ठीक है क्योंकि यह बहुत ही छोटी मोटी घटनाओं के घटित होने पर भी ऊपर नीचे होने लगता है अब यह Sensex किन किन कंपनियों से मिलकर बनता है तो इस Sensex को बीएससी या बीएससी Sensex भी कहा जाता है बीएसई Sensex भी सबसे मुख्य कंपनियों के Share पर आधारित है और आप के लिए यह जानना जरूरी है कि यह तीस Share के लिस्ट समय समय बदलती रहती है और मुंबई Share Market जरूरत के अनुसार इस लिस्ट में बदलाव करता रहता है लेकिन Sensex में कुल Share की संख्या तीस ही रहते है उसमें कुछ कम ज्यादा नहीं होता अब इन कंपनियों का सेलेक्शन कैसे होता है तो बीएससी तीस में से सबसे बड़े और सबसे सक्रिय रूप से कारोबार करने वाले Share में से ऐसे तीस कंपनियों को लिया जाता है जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है

मार्केट कैपिटल क्या होता है ?

अब बात करेंगे बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट के मार्केट कैपिटल क्या होता है उसके तो इससे कंपनी द्वारा कुल जारी किए गए Share की संख्या को प्रति Share Market भाव से गुणा करके प्राप्त किया जाता है अगर एक कंपनी ने एक रुपये की कीमत एक लाख जारी है तो कंपनी की कुल पूंजी एक लाख रुपये होगी अगर बाद में इस कंपनी के एक Share के बाजार में कीमत दस रुपये हो गई तो कंपनी की मार्केट के या बाजार पूंजी कुल दस लाख रुपये हो जाएगी अब बात करते हैं कि कौन से Share बेचे जाते हैं किसी भी कंपनी का मार्केट कैपिटल का वो हिस्सा जो बेचने के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकता है और उसी के आधार पर Sensex की गणना की जाती है आमतौर पर प्रमोटरों का हिस्सा यह सरकार का हिस्सा पूंजी में से निकाल दे तो बाकी बची पूंजी बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध हो सकती है यानी इन Share को बेचा जा सकता है |

Share Market में उतार-चढ़ाव कैसे होता है ?

अब हम लोगों की समझ के लिए उन कारणों को जानने का प्रयास करेंगे जिसकी वजह से Share Market में इतना उतार चढ़ाव आता है तो इस में ज्यादातर लोगों का मानना ऐसा है कि जब किसी कंपनी के Share की मांग बढ़ जाती है तो उससे Share का मूल्य बढ़ जाता है लेकिन इसके अलावा भी और भी कई कारण हैं जैसे यदि दो देशों के बीच कारोबारी और राजनीतिक संबंध बेहतर बनने की उम्मीद हो तो अर्थव्यवस्था की तरक्की के हिसाब से निवेशक Share Market में पैसा लगाने लगते है मानलो अगर हमारे प्रधानमंत्री मौन जी अमरीका की विदेश यात्रा पर जाते हैं तो अमरीका में रहने वाले विदेशी निवेशक इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि मोदी जी यहाँ के राष्ट्रपति के साथ कई समझौते कर सकते हैं जिससे कि दोनों देशों के बीच संबंध और भी अच्छा होने वाला है इसी उम्मीद में अमेरिका के निवेशक भारत में बड़ी मात्रा में पैसा लगाना शुरू कर देते हैं जिससे पूरे शहर वजन में उतार चढ़ाव शुरू हो जाता है तो उतार चढ़ाव का सबसे पहला कारण मॉनसून भारत एक कृषि प्रधान देश है अगर मौसम विभाग मानसून की अच्छी बारिश का अनुमान लगाता है तो Share Market में तेजी आती है निवेशक या अनुमान लगाते हैं कि अच्छी बारिश से अनाज का उत्पादन ज्यादा होगा इसका मतलब कि कृषि आधारित उद्योग की तरक्की ज्यादा होगी इनमें उद्योग में ट्रैक्ट खाद्य बीच कीटनाशक बाइक पर एफएमसीजी कंपनियां शामिल हैं निवेशकों को लगता है कि इन कंपनियों का कारोबार और मुनाफा बढ़ेगा यानी कृषि से जुड़ी कंपनियों की खरीदारी बढ़ जाती है  ऐसे उद्योगों में और भी ज्यादा पैसा निवेश किया जाएगा इस कारण निवेशकों को ज्यादा प्रॉफिट मिलेंगे दूसरा कारण आरबीआई यानी रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अगर रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीती की घोषणा में ब्याज दर में कमी करे तो कर्ज की दर सस्ती होंगी है  इस से बैंक से लोन लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और आखिर में बैंक को लाभ बढ़ेगा इस वजह से निवेशक बैंक और एनबीएफसी के Share की खरीदारी करते हैं और उनके भाव में तेजी आती है ब्याज दर बढ़ेगा तो इसका भाव में गिरावट आएगी अगला कारण सरकारी नीती अगर सरकार ब्याज दर में कमी या वृद्धि करें या राजकोषीय नीती जिसमें कर की दरों में कमी या वृद्धि या वाणिज्य नीती औद्योगिक नीती कृषि नीती यानी ऐसी कोई भी सरकारी नीती में आकर सरकार द्वारा कोई भी परिवर्तन किया जाता है तो इन सभी क्षेत्रों से जुड़ी सभी कंपनियों के Share के दामों में उतार चढ़ाव आ है और अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव पर दुनियाभर की नजरें होती हैं निवेशक मानते हैं कि अगर अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं तो विदेशी निवेशक भारत बाजार से पैसा निकालकर वहाँ लगाएंगे इस वजह से यहाँ के Share Market में खलबली शुरू हो जाती है इससे भारतीय बाजार में कमजोरी आती हैं अगले कारण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तो अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम भी Share Market के अभाव पर असर डालते हैं जैसे वर्तमान में जो ट्रेड वॉर यानी व्यापार युद्ध शुरू हुआ वो उत्तर कोरिया विवाद ईरान अमरीका विवाद या रूस अमेरिका जीवन इन सब की वजह से युद्ध की आशंका की वजह से निवेशक Share से पैसे निकाल कर सोने में निवेश करते हैं इस वजह से भी Share Market में उतार चढ़ाव होता है अगला कारण बजट बजट पेश करने के दौरान भी सरकार द्वारा की गई सकारात्मक या नकारात्मक घोषणा की वजह से भी अलग अलग कंपनियों के Share के दाम भी ऊपर नीचे होती है अगला कारण राजनीति तो इसमें देश में राजनीतिक स्थिरता यानी बहुमत की सरकार या गठबंधन की सरकार या फिर राजनीतिक वातावरण जिसमें वामपंथी या दक्षिणपंथी सरकार ऐसे कारण भी निवेशकों को निर्णय को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं मान ले अगर देश में वामपंथियों की सरकार आएगी तभी सरकार देश के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश का विरोध करेगी जैसे मल्टीब्रांड रिटेल जिससे के उस क्षेत्र की कंपनियां जिसमें बिग बाजार विशाल मेगा मार्ट जैसी कंपनियों के Share में गिरावट आएगी फिर अगला करें झुन प्रभाव तो इस समय प्रभाव यानी है रिपोर्ट की वजह से वे Share Market में अधिक बिकवाली तक खरीदारी की जाती है जिसकी वजह कभी कोई अफवाह या गुप्त जानकारी हो सकती है इस वजह से बड़ी संख्या में एक साथ बिकवाली या खरीददारी की वजह से शहर में भाव में उतार चढ़ाव होता है कभी कभी Share Market में उतार चढ़ाव डर या अनिश्चितता की वजह से भी होता है तो ये कुछ बड़े बड़े कारण इसके अलावा भी कई छोटे छोटे कारण भी कभी कभी Share Market को हिला कर रख देते हैं |

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